
कर्नाटक में तीन दिन से जारी सियासी उठा-पटक के बीच बीएस येदियुरप्पा ने गुरुवार सुबह 9 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। बीते 10 साल में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब येदियुरप्पा ने बिना बहुमत के शपथ ली है। सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन दिया था। एचडी कुमारस्वामी दो दिन में दो बार राज्यपाल से भी मिले थे। लेकिन गुजरात सरकार में वित्त मंत्री रह चुके और अब कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने बुधवार रात 11 बजे बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिया। इस फैसले के खिलाफ रात को ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। 2015 में याकूब मेनन की फांसी के बाद ऐसा दूसरी बार हुआ जब आधी रात को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। देर रात 2:10 बजे सुनवाई शुरू हुई। लंबी जिरह के बाद सुबह 4:20 पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले पर रोक से इनकार कर दिया। उधर, कांग्रेस राज्यपाल के फैसले के खिलाफ विधानसभा के बाहर धरने पर बैठ गई है। बता दें कि 1996 में जब देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने गुजरात की सरकार भंग करने की सिफारिश राष्ट्रपति से की थी और उस वक्त वजूभाई वाला भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे।
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